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अब आदि काल से ही "माँ मंगलागौरी" का वर्णन पुरातन पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है। जब कभी भी काशी में स्थित "माँ मंगलागौरी" का वर्णन आता है तो उनकी उत्पत्ति हेतु मयूखादित्य (सूर्यदेव) का यह वर्णन आता है की श्री मयूखादित्य ने दीर्घकाल तक भगवान शिव की तपस्या की जिसके फलस्वरूप शिव प्रसन्न होकर वहाँ अवतरित हुऐ और (गभतीश्वर) के रूप में विराजमान हुये एवं जहाँ शिव वहाँ शक्ति इस कथनानुसार भक्तों का मंगल करने हेतु भगवान शिव के गभतीश्वर स्वरुप के साथ माँ गौरी मंगला रूप में विराजित हुई। Visit site »| Tweet |
